कहीं हम ये तो नहीं कर रहे।

ये फरवरी मार्च में न जाने कौन सा बुखार चढ़ जाता है। अभिव्यक्ति की आज़ादी बनाम राष्ट्रभक्ति। ये मुद्दा इतना घमासान हो जाता है की इसके सामने सब धुंधला हो जाता है। एक भारितीय नागरिक संयुक्त राज्य अमरीका में मारा जाता है बस इसलिए क्योंकि वो सफ़ेद चमड़ी का नहीं है। और हमें इसकी फिकर नहीं है, होगी भी क्यों हमारा कौन सा सागा था। और सोशल मीडिया पे ट्रेन्ड भी नहीं हो रहा है तो जो भी थोडा सा दिमाग है वो इसमें क्यों खर्च करें। द ग्रेट अमेरिकन ड्रीम को जन्म देने वाले अमेरिका में आज एक नए तरह का नस्लभेद पनप रहा। ये दक्षिण पंथी नस्लवाद है। कु क्लक्स क्लान वाला नस्लवाद।

यू डोंट बिलोंग इन हियर, गेट अवे और गेट किल्ड। वहां की अवाम का एक हिस्सा इस बात का घोर समर्थक है। जिस चीज़ नें अमेरिका को इतना महान बनाया ये उसी को ले बीतेंगे और इनको हवा भी नहीं लगेगी। विल स्मिथ ने कहा की ऐसा नहीं है की नस्लवाद नहीं रहा है अमेरिका में, पर ये कुछ नया सा है। शायद एक भोर से पहले का धुत अँधेरा है। ह्यूग लॉरी कहते हैं की अमेरिका को आइसिस से पहले तो मधूमेह मार देगा, यहाँ के लोगों को इसकी चिंता करनी चाहिए। विल स्मिथ काली चमड़ी के हैं और ह्यूग लॉरी इंग्लिश हैं।अब रही बात ये की हम अमरीका अमरीका क्यों गा रहे हैं तो वो इसलिए की हमभी ऐसे ही दक्षिण पंथि पागलपन के बीच में हैं। अमा यार क्या ज़हर उगल दिया उस लड़की ने। इतना ही तो कहा था की जंग ने उसके पिता जी जान ली। जंग तो हुई थी ना, ये तो मानते हैं न आप? इतना ही गुस्सा आ गया तो आइये हरिहरन को  ट्रोल करते हैं, उन्होंने गाना गया था” जंग तो चंद रोज़ होती है, ज़िन्दगी बरसों तलक रोती है।” और साथ में जे .पी दत्ता साहब को ट्रोल करते हैं क्योंकि उन्होंने ने बोर्डर नामक फ़िल्म बनायी थी। सनी देओल को भी शिकंजे में लेते हैं, वो इस फ़िल्म का हिस्सा थे। फिर सबपे टैग लगाएंगे राष्ट्रदोह का। सबको जान से मारने की धमकी देंगे। कितना देशप्रेम उमड़ जाएगा न। पूरी दुनिया देखेगी हिन्दुस्तानियों का देशप्रेम। गरीब बच्चे मर जाते हैं हर रोज़, भूखे नंगे, किसी को फ़रक नहीं। अस्पताल में जिंदगियां दम तोड़ देती हैं इलाज के अभाव में। लोगों के पास सर के ऊपर छत नहीं। सीवर का पानी पीते हैं लाखों लोग हिन्दुस्तान में। वहां क्यों नहीं झलकता इतना आपार देश प्रेम। उसकी एक वजह है। उसके लिए आपको कुछ करने के लिए सोचना पड़ता है। कुछ करना पड़ता है। यहाँ तो सब आसान है, सबने ट्वीट किया, हम भी करेंगे, मज़ा आएगा। ये देखो लड़की बोल रही थी, इतनी औकात, हम तो चुप कराएंगे। 

एक कहावत सुनी थी बचपन में की किसी भी चीज़ का अधिक होना ज़हर बन जाता है। वामपंथ का अधिक होना नक्सलवाद को जन्म देता है, भुखमरी और क्लेश को जन्म देता है। उसी प्रकार ज़्यादा दक्षिण वाद हिटलर को जन्म देता है, एडम पुरइंटों को जन्म देता है। अभिव्यक्ति का अधिकार बहुत बड़ी चीज़ है, जानें गवाई हैं लोगों ने उसके लिए। उसे ऐसे सड़क पे नीलाम न करें। सवा अरब की आबादी का मुल्क है, लौंडों की लड़ाई से बड़े मुद्दे हैं यहाँ। उनपे ध्यान दें। 

जय हिन्द, जय भारत।